मुख्यमंत्री मोहन यादव के काफिले में घुसा वाहन, सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बुधवार यानी 20 मई की रात उस समय हड़कंप मच गया, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सुरक्षा काफिले (कारकेड) में अचानक एक निजी कार घुस गई। मुख्यमंत्री की सुरक्षा को देखते हुए इसे एक गंभीर लापरवाही माना गया और मौके पर मौजूद सुरक्षाबलों ने तुरंत एक्शन लेते हुए कार को रोक लिया। कोहेफिजा थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उस गाड़ी को जब्त कर लिया है। थाना प्रभारी के.जी. शुक्ला के मुताबिक, मुख्यमंत्री की सुरक्षा में हुई इस चूक को लेकर नियमों के तहत उचित कानूनी और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
रात के वक्त कैसे हुई सुरक्षा में यह बड़ी चूक
यह पूरा वाकया बुधवार रात करीब 10 बजे का है, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव उत्तर प्रदेश के लखनऊ से वापस भोपाल लौटे थे। स्टेट हैंगर (हवाई अड्डे) से बाहर निकलने के बाद मुख्यमंत्री का काफिला अभी कुछ ही दूरी पर पहुंचा था कि अचानक एक कार उनके सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए काफिले के बीच में आ गई। हाई-प्रोफाइल सुरक्षा होने के कारण पुलिस ने तुरंत कार चालक को हिरासत में ले लिया। जब पुलिस ने कड़ाई से पूछताछ की, तो एक हैरान करने वाला खुलासा हुआ कि कार चलाने वाला कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि पुलिस विभाग का ही एक आरक्षक (कॉन्स्टेबल) शैलेश अवस्थी था। इसके तुरंत बाद आरोपी आरक्षक का मेडिकल टेस्ट कराया गया और वरिष्ठ अधिकारियों ने उससे पूछताछ शुरू कर दी।
जेड प्लस सुरक्षा के नियम और आरक्षक पर संभावित गाज
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को देश की सर्वोच्च 'जेड प्लस' (Z+) सुरक्षा श्रेणी मिली हुई है, जिसके कारण उनके आवागमन के दौरान बेहद कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल और रूट प्लान लागू रहते हैं। ऐसे में किसी भी वाहन का बिना इजाजत काफिले के बीच आ जाना एक बहुत बड़ा खतरा माना जाता है। दिलचस्प बात यह है कि काफिले में कार घुसाने वाले आरक्षक शैलेश अवस्थी की खुद की तैनाती भी वीआईपी (VIP) सुरक्षा ड्यूटी में ही थी। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में विभागीय जांच शुरू कर दी गई है और जांच रिपोर्ट आने के बाद जल्द ही यह तय किया जाएगा कि आरोपी आरक्षक को लाइन अटैच (सस्पेंड जैसी विभागीय कार्रवाई) किया जाए या सेवा से निलंबित किया जाए।
15 घंटे की भूख और जल्दबाजी बनी घटना की वजह
पकड़े गए पुलिस आरक्षक शैलेश अवस्थी की जिम्मेदारी मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए आने वाले गुलदस्ते और फूल-मालाओं की सुरक्षा जांच करना था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आरक्षक ने पूछताछ में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि वह पिछले 15 घंटों से बिना कुछ खाए-पिए लगातार ड्यूटी पर तैनात था। अत्यधिक थकान और भूख के कारण वह बेहाल हो चुका था, इसलिए ड्यूटी खत्म होते ही वह खाना खाने के लिए जल्दबाजी में अपनी निजी कार से घर की तरफ निकला था। इसी आपाधापी और जल्दबाजी के चक्कर में उसे अंदाजा नहीं रहा और उसकी कार सीधे मुख्यमंत्री के चलते हुए काफिले के बीच जा घुसी।



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