आईबीबीआई ने समाधान प्रक्रिया सुव्यवस्थित, पारदर्शी बनाने मानदंडों में संशोधन किया
नई दिल्ली । भारतीय दिवाला और ऋण शोधन अक्षमता बोर्ड ने कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया मानदंडों में संशोधन किया है। इसमें समाधान के दौर से गुजर रही प्रत्येक रियल एस्टेट परियोजना के लिए अलग-अलग खाते रखना अनिवार्य बनाना शामिल है। इसके अलावा कर्जदाताओं की समिति समाधान योजना के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक निगरानी समिति का गठन कर सकेगी। इन संशोधनों का मकसद समाधान प्रक्रिया को अधिक सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाना है। संशोधित मानदंडों के अनुसार पारदर्शिता बढ़ाने और मूल्यांकन से संबंधित मुद्दों पर विवाद को कम करने के लिए सीओसी (कर्जदाताओं की समिति) के सदस्यों को मूल्यांकन पद्धति समझाने का प्रावधान है। आईबीबीआई ने यह भी कहा कि प्रक्रिया में सूचित भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए उचित मूल्य को सूचना ज्ञापन का हिस्सा बनाया जा सकता है। सीओसी को ऐसी जानकारी साझा न करने का निर्णय लेने की भी स्वतंत्रता होगी, जहां इस तरह का खुलासा समाधान के लिए फायदेमंद नहीं है। नियामक ने कहा कि रियल एस्टेट परियोजनाओं के संबंध में सीओसी प्रत्येक परियोजना के लिए अलग समाधान योजना मांग सकती है।



म.प्र. में सोम डिस्टिलरीज का लाइसेंस रद्द करने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा
एक मां पर बेटे की हत्या का आरोप, आज हाईकोर्ट ने सुनाया एतिहासिक फैसला
उमा भारती के परिवार को बम से उड़ाने की धमकी
Digvijaya Singh ने तोड़ी सौगंध? मंच पर दिखे राहुल गांधी के साथ
British Airways की फ्लाइट खराब मौसम के कारण डायवर्ट
प्रशासनिक संवेदनशीलता की मिसाल बने शिवम वर्मा