नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि दोनों देश फरवरी में तय की गई रूपरेखा के तहत बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए नए 10 प्रतिशत अतिरिक्त सीमा शुल्क के कारण अब इस समझौते पर अतिरिक्त दौर की वार्ता की आवश्यकता आन पड़ी है।

शुल्क वृद्धि और धारा-301 की कार्रवाई

अमेरिका ने कथित बंधुआ मजदूरी संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए 'धारा-301' जांच के आधार पर भारत समेत कई प्रतिस्पर्धी देशों के उत्पादों पर 24 जुलाई से 10 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लागू कर दिया है। वाणिज्य सचिव के अनुसार, इस नए घटनाक्रम के बाद दोनों देशों को व्यापारिक शर्तों पर दोबारा नए सिरे से चर्चा करनी पड़ रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि एक मजबूत व्यापार समझौता ही दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में स्थिरता और विश्वसनीयता ला सकता है।

रूसी तेल और यूपीआई सुधारों पर भारत का रुख

रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिकी सीनेट में पेश किए गए विधेयक पर सीधी टिप्पणी से इनकार करते हुए वाणिज्य सचिव ने इसे अमेरिका का आंतरिक मामला करार दिया। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है और अमेरिकी अधिकारियों के साथ हुई वार्ता अब तक आश्वस्त करने वाली रही है। इसके साथ ही, सूत्रों ने यूपीआई (UPI) सुधारों को द्विपक्षीय व्यापार वार्ता से जोड़ने की खबरों को पूरी तरह भ्रामक और निराधार बताया है।

प्रतिस्पर्धी लाभ मिलने पर ही लागू होगा पहला चरण

केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि भारत-अमेरिका बीटीए का पहला चरण तभी प्रभावी होगा, जब अमेरिका भारतीय उत्पादों को उसके वैश्विक प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले उचित और तुलनात्मक लाभ देना सुनिश्चित करेगा। उल्लेखनीय है कि जून माह में वाणिज्य मंत्री गोयल और यूएसटीआर (USTR) जैमीसन ग्रीर के बीच पहले चरण के मुख्य बिंदुओं पर द्विपक्षीय चर्चा हुई थी। भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान अमेरिका को लगभग 87 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य की वस्तुओं का रिकॉर्ड निर्यात किया है।