अटल जी की पुण्यतिथि पर कार्यक्रम को लेकर सवाल, ‘अटल परिसर’ में नहीं दिखी नेताओं की मौजूदगी
पलारी: देश के यशस्वी पूर्व प्रधानमंत्री और 'भारत रत्न' से सम्मानित स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की पुण्यतिथि के अवसर पर संपूर्ण देश में उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए अटल जी की राजनीतिक विरासत, उनके विचार और उनका वैचारिक मार्गदर्शन अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। परंतु, इसी बीच छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के अंतर्गत आने वाले पलारी कस्बे से उनकी पुण्यतिथि पर एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जो स्थानीय राजनीतिक गलियारों में भारी चर्चा का विषय बन गया है। यहाँ नगर के वार्ड क्रमांक-6 में स्थित 'अटल परिसर' में भाजपा संगठन की ओर से किसी भी प्रकार के सामूहिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन न किए जाने को लेकर अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
'अटल परिसर' में नजर नहीं आई भाजपा संगठन की सामूहिक मौजूदगी
पलारी के प्रतिष्ठित अटल परिसर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की आदमकद प्रतिमा स्थापित है। पुण्यतिथि जैसे राष्ट्रीय और वैचारिक रूप से महत्वपूर्ण अवसर पर यह उम्मीद की जा रही थी कि यहाँ भाजपा मंडल, स्थानीय जनप्रतिनिधि, पार्टी पदाधिकारी और तमाम कार्यकर्ता बड़ी संख्या में एकत्र होकर उन्हें श्रद्धांजलि देंगे। हालांकि, धरातल पर स्थिति यह रही कि उस परिसर में संगठन की तरफ से कोई भी बड़ा, औपचारिक या सार्वजनिक आयोजन देखने को नहीं मिला।
उधर, दूसरी तरफ यह बात भी सामने आई कि भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अटल जी को याद करते हुए अपने श्रद्धांजलि संदेश जरूर साझा किए। इसी बात को लेकर अब स्थानीय स्तर पर यह तीखी चर्चा शुरू हो गई है कि क्या देश के इतने बड़े और सम्मानित नेता को श्रद्धांजलि अर्पित करने की औपचारिकता अब केवल सोशल मीडिया पोस्ट तक ही सिमट कर रह गई है?
सोशल मीडिया पर दी गई श्रद्धांजलि बनी चर्चा और बहस का कारण
विशेष अवसरों पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर डिजिटल श्रद्धांजलि देना आज के समय में आम बात हो चुकी है। लेकिन पलारी का यह मामला इसलिए खास बन गया क्योंकि जिस स्थान पर आधिकारिक रूप से 'अटल परिसर' नाम से उनकी प्रतिमा स्थापित है, ठीक उसी जगह पर संगठन की कोई भौतिक या सामूहिक उपस्थिति नजर नहीं आई।
स्थानीय नागरिकों और राजनीतिक विश्लेषकों के बीच इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ जहां कुछ लोग इसे संगठनात्मक स्तर पर एक बड़ी चूक या लापरवाही मान रहे हैं, वहीं कुछ इसे स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम न होने तक का एक सामान्य विषय बता रहे हैं।
छत्तीसगढ़ के निर्माण में भी रहा है अटल जी का विशेष योगदान
अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के सबसे मजबूत स्तंभ और देश के सर्वमान्य नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान देश को सुशासन की एक नई दिशा दी और भारतीय राजनीतिक इतिहास में अपनी एक अमिट छाप छोड़ी। अपनी उत्कृष्ट भाषण शैली, सर्वसमावेशी लोकतांत्रिक सोच और राजनीतिक समन्वय के लिए उन्हें आज भी पूरे देश में आदर के साथ याद किया जाता है।
विशेष तौर पर छत्तीसगढ़ राज्य के गठन में उनके ऐतिहासिक योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता, जिसके कारण पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में अटल बिहारी वाजपेयी का नाम अत्यंत आदर और सम्मान के साथ लिया जाता है। ऐसे में, उनके ही नाम पर बने और सुसज्जित 'अटल परिसर' में उनकी पुण्यतिथि के दिन किसी भी प्रकार का सार्वजनिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित न होना स्थानीय भाजपा संगठन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रहा है।
पलारी में सक्रिय हैं कई दिग्गज भाजपा नेता
इस पूरे प्रकरण को लेकर हैरानी इसलिए भी जताई जा रही है क्योंकि पलारी क्षेत्र में भाजपा से जुड़े कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि सक्रिय रूप से मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद अटल जी की प्रतिमा पर किसी भी सामूहिक कार्यक्रम का आयोजन न होने से पार्टी के निष्ठावान कार्यकर्ताओं के मन में भी अब दबी जुबान से सवाल उठने लगे हैं।
स्थानीय प्रबुद्धजनों का मानना है कि इस तरह के राष्ट्रीय और वैचारिक अवसरों पर स्मारक स्थलों पर कार्यक्रमों का आयोजन होने से न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ता है, बल्कि आम नागरिकों और विशेष रूप से युवा पीढ़ी को भी स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के आदर्शों और उनके विचारों से जुड़ने का एक बेहतरीन अवसर प्राप्त होता है।













सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया दायरा, वन की परिभाषा से जुड़े 2023 के कानून की वैधता पर होगी सुनवाई
EPFO की वेतन सीमा में बड़ा बदलाव, 51 लाख से ज्यादा कर्मचारियों को मिलेगा फायदा
लेडी सिंघम ने 48 घंटों में हत्या के आरोपी को किया गिरफ्तार
पुलिस ज्यादती की जांच वाली कमेटी पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, नहीं होगा पुनर्गठन