जिला अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल, मासूम की मौत के बाद सिविल सर्जन कानूनी शिकंजे में
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले से स्वास्थ्य विभाग की एक बेहद गंभीर और झकझोर देने वाली लापरवाही का मामला सामने आया है। जिला अस्पताल के जिम्मेदारों की भारी कोताही के चलते एक प्रसूता मां की जिंदगी गंभीर संकट में पड़ गई और समय पर उचित इलाज न मिलने के कारण उसके नवजात शिशु की कोख में ही मौत हो गई। इस सनसनीखेज मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए जिला कलेक्टर जितेंद्र यादव ने त्वरित और बड़ा एक्शन लिया है। कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बाद अस्पताल के सिविल सर्जन के खिलाफ सुसंगत धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली गई है, और स्थानीय पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच में जुट गई है।
लैब रिपोर्ट में लेटलतीफी और डॉक्टरों की लापरवाही बनी मासूम की मौत की वजह
घटना के विवरण के मुताबिक, बीते सोमवार की रात करीब ढाई बजे के आसपास शहर के नजदीक स्थित टोलागांव निवासी गर्भवती महिला कविता मांडवी को प्रसव पीड़ा (लेबर पेन) उठने के बाद जिला अस्पताल लाया गया था। अस्पताल पहुंचते ही उसे मातृ-शिशु अस्पताल (MCH) में भर्ती कराया गया। नियमानुसार डॉक्टरों ने उसका ब्लड सैंपल लेकर जांच के लिए पैथोलॉजी लैब भिजवा दिया। परिजनों को अस्पताल के स्टाफ द्वारा यह बताया गया था कि सुबह लगभग 10 बजे तक जांच रिपोर्ट मिल जाएगी। लेकिन जब अगले दिन सुबह परिजन निर्धारित समय पर रिपोर्ट लेने पहुंचे, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि अभी रिपोर्ट तैयार नहीं हुई है, इसलिए नहीं दी जा सकती।
समय पर ऑपरेशन न होने के कारण गर्भ में ही हो गई नवजात शिशु की मौत
उधर अस्पताल के भीतर गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा की वजह से बुरी तरह तड़प रही थी और उसका दर्द असहनीय होता जा रहा था। महिला की बिगड़ती हालत को देखकर चिंतित परिजनों ने मौके पर मौजूद डॉक्टरों से तुरंत सिजेरियन ऑपरेशन (डिलिवरी) करने की बार-बार गुहार लगाई। लेकिन लापरवाह डॉक्टरों ने यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि जब तक लैब से ब्लड टेस्ट की रिपोर्ट हाथ में नहीं आ जाती, तब तक वे ऑपरेशन नहीं करेंगे। इस बीच महिला की शारीरिक स्थिति और अधिक नाजुक हो गई। जब आनन-फानन में उसे जबरन ऑपरेशन थिएटर (OT) ले जाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी, और ऑपरेशन के दौरान ही नवजात बच्चे की मौत हो चुकी थी।
परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लगाए गंभीर आरोप, सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग
इस हृदयविदारक घटना से आहत मृतका के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि ऑपरेशन से ठीक पहले तक गर्भस्थ शिशु की हार्टबीट (धड़कन) पूरी तरह सामान्य और अच्छी थी, लेकिन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ द्वारा ऑपरेशन करने में जानबूझकर अत्यधिक देरी किए जाने की वजह से ही उनके बच्चे की जान गई है। इस दुखद और आक्रोशित करने वाली घटना के बाद परिजनों ने अनुविभागीय अधिकारी (SDM) को लिखित शिकायत सौंपते हुए इस घोर लापरवाही में संलिप्त समस्त अस्पताल स्टाफ और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ तत्काल कड़ी कानूनी कार्रवाई करने की पुरजोर मांग की है।




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