डिजिटल दौर में बदली तस्वीर: फैंसी स्टोर से प्रीति यादव बनीं नई पीढ़ी की आत्मनिर्भर उद्यमी
रायपुर : आज के आधुनिक और तेजी से बदलते दौर में जहां डिजिटल तकनीक और आत्मनिर्भरता सफलता की नई परिभाषा बन चुके हैं, वहीं विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत तिलौली की प्रीति यादव ने अपने हौसले और समझदारी से इस बदलाव को अवसर में बदल दिया है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि सोच आधुनिक हो और इरादे मजबूत हों, तो गांव में रहकर भी सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है।
एक साधारण परिवार से आने वाली प्रीति यादव के सामने भी आर्थिक चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों से हार मानने के बजाय खुद को बदलते समय के साथ ढालने का फैसला किया। उन्होंने “दुर्गा महिला स्व सहायता समूह” से जुड़कर न केवल आर्थिक सहयोग प्राप्त किया, बल्कि आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की नई दिशा भी हासिल की।
समूह से मिले 60 हजार रुपये के ऋण का उपयोग करते हुए प्रीति ने अपने गांव में चूड़ी, कॉस्मेटिक्स और फैंसी आइटम का स्टोर शुरू किया। लेकिन उनकी सोच केवल पारंपरिक दुकान तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ग्राहकों की पसंद को समझते हुए आधुनिक ट्रेंड के अनुसार उत्पाद उपलब्ध कराना शुरू किया, जिससे उनकी दुकान जल्दी ही युवाओं और महिलाओं के बीच लोकप्रिय हो गई। प्रीति ने अपने व्यवसाय में छोटे-छोटे आधुनिक प्रयोग भी किए-जैसे ग्राहकों से बेहतर संवाद, मांग के अनुसार नए प्रोडक्ट लाना, और त्योहारों व विशेष अवसरों पर आकर्षक कलेक्शन उपलब्ध कराना। यही कारण है कि उनकी दुकान अब सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि गांव में एक “ट्रेंडिंग शॉप” के रूप में पहचान बना चुकी है।
आज प्रीति यादव अपने इस व्यवसाय से प्रतिवर्ष लगभग 80 से 85 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। यह आय न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का नया एहसास भी दे रही है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा, घर के खर्च और भविष्य की योजनाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा रही हैं। आधुनिक युग में सफलता केवल कमाई तक सीमित नहीं होती, बल्कि सोच, आत्मविश्वास और पहचान में बदलाव भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। प्रीति यादव इस बदलाव की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं। आज वे न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी यह सिखा रही हैं कि बदलते समय के साथ खुद को ढालना ही सफलता की कुंजी है।
उनकी प्रेरक यात्रा से प्रभावित होकर अब कई महिलाएं स्व सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। प्रीति यादव की यह कहानी बताती है कि आधुनिक सोच, सही अवसर और मेहनत के साथ गांव की महिलाएं भी नए भारत की मजबूत उद्यमी बन सकती हैं।



केकेआर मैच में मुकुल चौधरी की बल्लेबाजी पर फिदा हुए सुनील गावस्कर
कृति सैनन पहुंचीं भोपाल, कक्षा से पंचायत तक विकास कार्यों का लिया जायजा
पूर्व मंत्री अनूप मिश्रा के छोटे भाई का निधन, क्षेत्र में शोक की लहर
सिनेमाघरों में रिलीज ‘डकैत’, जानें आदिवी शेष-मृणाल ठाकुर की फिल्म की पूरी डिटेल
अनुराग कश्यप ने ‘लुटेरा’ से जुड़ा किस्सा बताया, रणवीर सिंह को लेकर कही दिलचस्प बात
दिल्ली के तिलक नगर में बाल संत अभिनव अरोड़ा के परिवार पर हमला, देर रात हंगामा