चीन की नई चिंता: बच्चों के दिमागी विकास पर एआई का असर, क्या कदम उठाए जाएं?
चीन: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Ai) की लड़ाई में अमेरिका को पछाड़ने में जुटा चीन अब खुद टेंशन में आ गया है. टेंशन की वजह न तो टेक्नोलॉजी है और न ही निवेश. दरअसल, चीन को यह डर सता रहा है कि कहीं Ai की वजह से आने वाली पीढ़ी के बच्चे अपना दिमाग ही न लगाना छोड़ दें. चीन अब इस बात पर विचार कर रहा है कि बच्चों के स्कूल में Ai को लेकर किस तरीके का ट्रेनिंग दिया जाए, जिससे बच्चे अपना दिमाग भी इस्तेमाल करे और Ai का भी.
चीन को क्यों सता रहा है यह डर?
Ai की वजह से बच्चों के बुद्धी खोने का डर चीन को क्यों सता रहा है, यह सवाल भी चर्चा है. हाल ही में चीन के सरकारी मैगजीन बान्यूएतान ने उत्तरी चीन में एक सर्वे किया है. यह सर्वे स्कूल के बच्चों को लेकर किया गया है. कहा जा रहा है कि सर्वे की रिपोर्ट ने चीनी अधिकारियों की टेंशन बढ़ा दी. सर्वे में शामिल 700 बच्चों में 280 बच्चों ने कहा कि वे हॉलीडे में अपना होमवर्क करने के लिए डीपसीक, डोबाओ जैसे चैटबॉट का इस्तेमाल करते हैं. इन बच्चों का कहना था कि इससे काम तुरंत हो जाता है और दिमाग भी नहीं लगाना पड़ता है. 210 बच्चों का कहना था कि वे सवाल समझने और अन्य छोटे कामों के लिए Ai का इस्तेमाल करते हैं. कहा जा रहा है कि इस सर्वे ने चीन की टेंशन बढ़ा दी है. चीन को लग रहा है कि Ai की वजह से आने वाले वक्त में उनके बच्चे आलोचनात्मक चिंतन कौशल खो सकते हैं.
डैमेज कंट्रोल की रणनीति बनाने में जुटे
Ai की वजह से बच्चे बुद्धी न खो दें, इसके लिए चीन ने स्पेशल प्लान पर काम करना शुरू कर दिया है. रिपोर्ट के मुताबिक चीन स्कूलों में Ai के उपयोग और नैतिकता को पढ़ाने के तरीके पर विचार कर रहा है. जानकारों का कहना है कि अगर इसे तुरंत नहीं लागू किया गया तो आने वाले वक्त में परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है. चीन के स्कूलों में Ai के दुरुपयोग को रोकने के जिन प्लानों की चर्चा हो रही है, उनमें होमवर्क किस तरीके का दिया जाए इस पर ज्यादा विचार हो रहा है.



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